Doha

बन्दौं सन्तोषी चरण रिद्धि-सिद्धि दातार। ध्यान धरत ही होत है दुःख सागर से पार॥ भक्तन को सन्तोष दे सन्तोषी तव नाम। कृपा करहु जगदम्ब अब आया तेरे धाम॥

Chaupai

जय सन्तोषी मात अनूपम। शान्ति दाविनी रूप मनोरम॥ सुन्दर वरण चतुर्भुज रूपा। वेश मनोहर ललित अनुपा॥1॥

श्वेताम्बर रूप मनहारी। मां तुम्हरी छवि जग से न्यारी॥ दिव्य स्वरूपा आयत लोचन। दर्शन से हो संकट मोचन॥2॥

जय गणेश की सुता भवानी। रिद्धि-सिद्धि की पुत्री ज्ञानी॥ पति-लज्जा राखी महतारी। सुखी करहु जेते व्रतधारी॥3॥

शुक्रवार व्रत के तुम हो कारण। भक्तन के तुम दुःख निवारण॥ गुड़ और चना प्रसाद चढ़ावै। ध्यान देह धरि कथा सुनावै॥4॥

भक्त प्रेम से जो यश गावै। तुम्हारी कृपा शीघ्र ही पावै॥ लज्जा राखो हमारी माता। तुम हो जग की भाग्य विधाता॥5॥

जय सन्तोषी मात दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥ विघ्न हरण मंगल करन, सन्तोषी सुख धाम। दुःख दरिद्र सब नाश हो, जपें तुम्हारा नाम॥6॥

शरण गहे की लज्जा राखियो। भक्ति भाव से पूजा साखियो॥ संतोषी माँ की आरती, जो कोई जन गावे। रिद्धि-सिद्धि सुख सम्पत्ति, जी भर के वो पावे॥7॥

गुड़ चने का भोग लगाऊँ। बार-बार मैं शीश नवाऊँ॥ जय जय जय जगदम्ब भवानी। तुम सम कोई न दयालु दानी॥8॥

जो कोई यह चालीसा गावे। सब सुख भोग परम पद पावे॥ निशिदिन ध्यान धरे जो तेरा। मिट जाए सब संकट उसका॥9॥

पुत्र-पौत्र सब सुख दे माता। तेरे चरण रज का मैं प्यासा॥ सन्तोषी माँ व्रत है प्यारा। जग में बजे जयकारा तुम्हारा॥10॥

Doha

संतोषी माँ के चरण, नित बन्दौं कर जोड़। रिद्धि-सिद्धि मोहे दीजिये, जय जननी कर जोड़॥

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