Doha

नील गगन पर बैठ कर, देख रही माँ रूप। भक्तों की रक्षा करे, धरे अनेक स्वरूप॥ चण्ड-मुण्ड संहारिणी, चामुण्डा सुख धाम। चरण शरण में राखियो, ज पूँ तेरा नाम॥

Chaupai

जय जय चामुण्डा महरानी। तुम हो जग की शक्ति सयानी॥ चण्ड और मुण्ड को मारने वाली। दुष्ट दलन को खप्पर वाली॥

रक्तबीज का रक्त जो पिया। देवों का भय दूर किया॥ विराल रूप धरि तुम आई। कालरात्रि बन दुष्ट नसाई॥

सिंह वाहिनी माँ जगदम्बा। नहिं कीन्हो पल भर विलम्बा॥ खड्ग त्रिशूल हाथ में साजे। गले मुण्डन की माला राजे॥

तीसरे नेत्र से अग्नि ज्वाला। निकले जैसे महा विकराला॥ जब जब पाप बढ़ा धरती पर। तब तब आई तुम रूप धर कर॥

कांगड़ा वाली ज्वाला माई। चामुण्डा बन तुम ही आई॥ भक्त जनों के कष्ट निवारे। बिगड़े काज सँवारे सारे॥

जो भी दर पे शीश झुकावे। मन वांछित फल वो पा जावे॥ रोग शोक सब दूर हटावे। दुःख दरिद्र निकट न आवे॥

नवरात्रों में जो गुण गावे। माँ चामुण्डा उसे बचावे॥ पुत्र हीन को पुत्र दे माता। निर्धन को धन सुख का दाता॥

बांझन को तुम पुत्र खिलाती। कोढ़ी को तुम काया दिलाती॥ अंधे को तुम आँखें देती। सच्चे मन की सेवा लेती॥

जय जय जय माँ चामुण्डा रानी। तेरी महिमा सब जग जानी॥ करो कृपा हे जगदाधार। नैया मेरी लगा दो पार॥

चामुण्डा चालीसा जो गावे। सब सुख सम्पति घर में आवे॥ निशिदिन ध्यान धरे जो तेरा। उसका होवे काज सवेरा॥

Doha

चामुण्डा माता सदा, सहाय रहो हर काम। भक्त जनों के कष्ट हर, पहुँचाओ निज धाम॥ शरण तुम्हारी आ पड़ा, अब न सतावे कोई। दया दृष्टि माँ कीजिये, बालक जाने मोई॥

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