Doha

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय जय काली (३) कलकत्ता वाली तेरा वचन न जाए खाली..। ॐ नमः शिवाय … ॐ नमः शिवाय…

Chaupai

जय काली कल्याणी माता। शुभ मंगल करनी विख्याता॥ श्यामा शंका हरणी रानी। निशि-दिन भक्त करे कल्याणी॥1॥

जय जय जय काली कंकाली। मन की हो तुम भोली भाली॥ दुष्ट दलन को बनी विकराला। लाल नेत्र और मुण्डन माला॥2॥

चार भुजा कर खप्पर सोहे। बाएँ हाथ कटा सर जोहे॥ दाहिने हाथ कटार संभाली। खड़्ग खप्पर वाली हे काली॥3॥

भक्त प्रेम से जो भी ध्याता। सुख सम्पति आनन्द वो पाता॥ पाप ताप, दुःख दूर नसावे। भक्त जनन के कष्ट मिटावे॥4॥

जब जब दानव भीड़ पड़ी है। बन कर ढाल माँ आप खड़ी है॥ रक्तबीज दानव जब आया। देवों का जब मान घटाया॥5॥

मार-मार कर सब को भगाया। देवो ने तब तुम्हें मनाया॥ कुपित हो, हो उठी विकराला। रूप धार कर बनी कराला॥6॥

क्रोधित हो दानव को मारा। रक्तपान कर उसको संहारा॥ खप्पर भर-भर रक्त वो पीती। भाग खड़ा हुआ दानव भीति॥7॥

शुम्भ-निशुम्भ को तुमने मारा। चण्ड-मुण्ड का किया संहारा॥ महिषासुर को मार गिराया। भक्तो का सन्ताप मिटाया॥8॥

रूप सौम्य भी है हितकारी। भक्त जनों की हो महतारी॥ जो भी द्वार तुम्हारे आता। मन वांछित फल वो पा जाता॥9॥

साधु संत सब पारस आए। तुम बिन कोई ना सुख पाए॥ तुम्हरी महिमा वेद बखाने। सच्चे मन से जो तुम्हें जाने॥10॥

काली चालीसा जो गावे। सब सुख भोग परमपद पावे॥ निशि-दिन जो भी ध्यान लगावे। दुःख दरिद्र, भय निकट न आवे॥11॥

Doha

प्रेम सहित जो करे, काली चालीसा पाठ। दुःख दरिद्र मिट जाए सब, होवे ठाठम-ठाठ॥

Language
Font Size